पूर्वांचल, इस बार नवरात्रि की बेला पर पांडालों में स्थापित होने वाली मूर्तियों ने शहरवासियों को न सिर्फ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया बल्कि आध्यात्मिक भव्यता के साथ सामाजिकता का भी पाठ पढाया.
हर वर्ष की भांति इस बार भी पंडालो में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के साथ साथ लक्ष्मी गणेश कार्तिकेय और शेष अन्य देवी देवता विराजमान रहे. लगता है कि इस बार मूर्तिकारों के जेहन में देश के भीतर की ज्वलंत समस्याएं भी कौंध रही थी. देवरिया जनपद के स्टेशन रोड पर स्थापित पंडाल में मां दुर्गा समेत कुछ अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां रखी गई जिन्हें देखने आए श्रद्धालुओं की नजर बगल में रखे नीले ड्रम पर पड़ी तो सभी एकबारगी चौंक गए, ड्रम के बगल में दो बोरी पैक्ड सीमेंट के थे, वह नीला ड्रम जमे हुए सीमेंट से पैक था, उसमें एक युवक का सिर दिखाई दे रहा था, उसके बगल में एक युवती की मूर्ति थी उसका हाथ अपने ब्वायफ्रेंड के हाथ में था, ब्वायफ्रैंड के दूसरे हाथ में रक्तरंजित हंसिया भी था. लोगों को समझते देर न लगी मेरठ शहर में घटित सौरभ हत्या कांड वाली वारदात, जिसमें मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति की जघन्य हत्या की थी. हैरानी की बात तो यह भी थी कि मुस्कान के एक तीन वर्ष का बेटा भी था. मूर्तिकार ने धर्म के साए में अधर्म पर प्रहार किया, जिसको दर्शनार्थियों ने भी सहर्ष स्वीकार किया. 
दूसरा पांडाल गोरखपुर जनपद के रूस्तमपुर स्थित जगदीश हॉस्पिटल के पास का है,, लोग बाग नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और चर्चा करते हैं जबकि मुर्तिकार ने मां दुर्गा की एक विशाल प्रतिमा बनाई और उसमें देवी मां के 108 शीश और उतने ही हाथ दर्शाए हैं, अद्भुत हैै यह मूर्ति और मूर्तिकार,,
तीसरी पंडाल की जबरदस्त चर्चा रही जो असुरन चौराहे पर स्थापित की गई थी, अंदर मूर्ति तो देवी देवताओ की ही थी लेकिन पांडाल के बाहर आपरेशन सिंदूर की उन वीरांगनाओं की तस्वीरें लगाई गई थीं जिन्होंने पाक सेना का मटियामेट कर डाला था, आपको याद होगा भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर , पाक समर्थित आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में मारे गए 26 निर्दोष भारतीयों का बदला था.
यह वही टीस है जो वक्त के मरहम के साथ घाव को भर तो देती है लेकिन दर्द रह जाता है.










