गोरखपुर : देश में बच्चों और किशोरों के बीच एक ऐसा नशा तेजी से फैल रहा है,
जिस पर न तो परिवार ध्यान दे रहा है
और न ही समाज खुलकर बात कर रहा है।
इन्हें कहा जाता है Inhalants —
यानी ऐसे रासायनिक पदार्थ,
जिन्हें सूंघकर नशा लिया जाता है।

पेंट, थिनर, गोंद, पेट्रोल, व्हाइटनर,
डिओड्रेंट और स्प्रे जैसी चीज़ें
आसानी से उपलब्ध होने के कारण
बच्चों की पहुंच में होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार,
Inhalants का असर सीधे दिमाग पर पड़ता है।
इससे बच्चों की याददाश्त कमजोर होती है,
सीखने की क्षमता घटती है
और व्यवहार में आक्रामकता बढ़ती है।
कई मामलों में यह नशा
दिल की धड़कन को अचानक अनियमित कर देता है,
जिससे ‘Sudden Sniffing Death’
जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि
Inhalants की लत बहुत जल्दी लग जाती है
और यही आगे चलकर
शराब और अन्य ड्रग्स की ओर ले जाती है।
माता-पिता के लिए चेतावनी संकेत हैं —
कपड़ों से केमिकल की गंध,
नाक के आसपास घाव,
अचानक व्यवहार परिवर्तन
और पढ़ाई से दूरी।
- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि
बच्चों से डर के बजाय संवाद किया जाए,
घर में केमिकल पदार्थ सुरक्षित रखे जाएं
और लक्षण दिखने पर
तुरंत चिकित्सकीय सहायता ली जाए।
बचपन को नशे से बचाना
केवल परिवार की नहीं,
पूरे समाज की जिम्मेदारी है।











