January 13, 2026 6:07 am

अन्त्येष्टि स्थल की दरकने लगी छत,धंसी जमीन, धन का बंदरबाट

__ दो वर्ष के भीतर छत में आई दरार, टूटने लगी फर्श व उखड़ने लगी टाइल्स

_ 24 लाख 36 हजार धनराशि की लागत से निर्माण

गोरखपुर – चरगांवा विकास खंड की सियारामपुर ग्राम पंचायत में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अंत्येष्टि स्थल विकास योजना को खुलेआम पलीता लगाए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति ग्राम पंचायत 24 लाख 36 हजार रुपये (स्थानीय स्तर पर लगभग 30 लाख रुपये व्यय दर्ज) की धनराशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

दो वर्ष पूर्व निर्मित इस अंत्येष्टि स्थल में शवदाह प्लेटफॉर्म, शांति स्थल, शौचालय, स्नानागार और शुद्ध पेयजल सुविधा विकसित किए जाने थे। आरोप है कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव द्वारा गुणवत्ताविहीन निर्माण कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। निर्धारित मानकों की अनदेखी का नतीजा यह है कि महज दो वर्षों के भीतर ही अंत्येष्टि परिसर बदहाली का शिकार हो चुका है।

ग्रामीणों के अनुसार, परिसर में बने तीन शौचालय भवनों की टाइल्स उखड़ चुकी हैं, फर्श टूट रही है और छतें दरकने लगी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां शुद्ध पेयजल की सुविधा अनिवार्य थी, वहां आज भी ग्रामीणों को पानी तक नसीब नहीं है। शवदाह प्लेटफॉर्म, शांति स्थल, शौचालय और स्नानागार—सभी संरचनाएं घटिया निर्माण की गवाही दे रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण पूरा दिखाकर सरकारी व्यय रजिस्टर में लाखों रुपये का भुगतान दर्ज करा लिया गया, लेकिन गुणवत्ता की कोई परवाह नहीं की गई। इससे भी गंभीर सवाल यह है कि पिछले दो वर्षों में न तो ब्लॉक स्तर और न ही जिला स्तर के किसी अधिकारी ने अंत्येष्टि स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया, जिससे लापरवाही और जवाबदेही की पोल खुलती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अंत्येष्टि स्थल का तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि आम ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के समय अपमान और असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस मामले में उप निदेशक पंचायत, गोरखपुर मंडल, हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा है—

“मामला अभी संज्ञान में आया है। जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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