January 13, 2026 5:58 am

जयगुरु के जयघोष से गूंजा गोरखपुर महानगर

योगानंद की जन्मस्थली पर रच गया इतिहास

अरविंद श्रीवास्तव, गोरखपुर।

घोष चौराहा और महानगर क्षेत्र उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब परमहंस योगानंद की 133वीं जन्मतिथि उनके जन्मस्थान पर पहली बार भव्य, शांत और महाध्यान के साथ मनाई गई। करीब एक एकड़ क्षेत्र में फैली निर्माणाधीन परमहंस योगानंद स्मृति स्थली में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन योगदा सत्संग समिति ऑफ इंडिया द्वारा किया गया।

इस विशेष अवसर पर सेल्फ रियलाइजेशन फैलोशिप, कैलिफोर्निया (अमेरिका) के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय से प्रधान संन्यासी स्वामी विश्वानंद सहित चार अन्य वरिष्ठ विदेशी संन्यासिनियों ने भाग लिया। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से योगदा सत्संग समिति से जुड़े महिला और पुरुष साधकों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।

300 मीटर की शांत पालकी यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के तहत गोरखपुर जनपद के कोतवाली थाना परिसर से सटे निर्माणाधीन योगानंद स्मृति स्थल प्रांगण तक घोष कंपनी चौराहे से करीब 300 मीटर लंबी पालकी यात्रा निकाली गई।

 



इस पालकी यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी प्रकार का तामझाम, शोरगुल, डीजे या कान फाड़ने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग नहीं किया गया।
पूरी यात्रा के दौरान केवल “जय गुरु” के पवित्र उद्घोष गूंजते रहे, जिसने वातावरण को अत्यंत शांत और दिव्य बना दिया।

विदेशी संन्यासी ने निभाई सनातन परंपरा की अगुवाई

देश के इतिहास में यह पहली बार देखने को मिला, जब सनातन परंपरा की विधिवत अगुवाई एक अमेरिकी बुजुर्ग सन्यासी ने भारतीय धर्म रक्षक के रूप में देशी गणवेश में पूरी श्रद्धा और शास्त्रीय विधि-विधान के साथ की।


परमहंस योगानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीपदान और आरती संपन्न कराई गई। इसके बाद 82 वर्षीय उक्त बुजुर्ग संन्यासी द्वारा उपस्थित सभी गणमान्य साधकों की भी आरती की गई।

133 वर्षों में पहली बार विदेशी संन्यासी ने किया शंखनाद

योगानंद की जन्मस्थली पर इस आयोजन के दौरान कई अद्भुत और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिले।
133 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब किसी विदेशी संन्यासी द्वारा शंखनाद किया गया।
इसके साथ ही जिस स्थान पर परमहंस योगानंद की प्रतिमा स्थापित की गई, वह वही कक्ष था, जहाँ योगानंद जैसे महान तपस्वी का जन्म हुआ था।

देश-विदेश के संतों की उपस्थिति

इस पावन अवसर पर रांची से आए संन्यासी ब्रह्मचारी सौम्यानंद जी की भी विशेष भूमिका रही।
कार्यक्रम में देशभर से आए साधकों ने ध्यान, साधना और गुरु भक्ति के माध्यम से योगानंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकार किया संकल्प

गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष और पिछले 40 वर्षों से योगदा संस्थान से जुड़े प्रोफेसर आर.सी. श्रीवास्तव ने स्मृति स्थल निर्माण को लेकर भावुक अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन ध्यान से पहले ईश्वर से यही प्रार्थना होती थी कि योगानंद की जन्मस्थली पर एक पवित्र तपोस्थली की स्थापना हो।
यह संकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही साकार हुआ और स्मृति स्थल के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण

परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर आयोजित यह आयोजन केवल एक जन्मोत्सव नहीं था, बल्कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक शांति और विश्व-बंधुत्व का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
घोष चौराहा से योगानंद स्मृति स्थली तक गूंजता “जय गुरु” का उद्घोष आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं को प्रेरित करता रहेगा।


पंडाल में विभिन्न परिधानो और गणवेश में बैठे यह सभी साधक योगानंद के सन्यासी और अनुयाई हैं।

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें