March 12, 2026 8:48 am

“जब अस्त होते सूर्य की किरणें जल में उतरती हैं,
तो हर दिल में गूंज उठता है एक ही नाम —
‘जय छठी मइया’
आस्था, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति समर्पण का पर्व — छठ महापर्व — आज पूरे भक्तिभाव से मनाया गया.” “मां अकलेश शक्ति सेवा सदन परिवार एवं पूर्वांचल सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वाधान में
श्री अशोक विला, संग्रहालय मंदिर परिसर में
सायंकाल 5 बजकर 15 मिनट पर
अस्त होते सूर्य देवता को अर्घ्य देकर मां छठी मैया का पूजन एवं आराधना की गई।” “चार दिन के इस पर्व की यह संध्या सबसे पावन मानी जाती है.

भक्त अपने पूरे परिवार के साथ मां छठी मैया की आराधना कर
संतान सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।
कहा गया है —
‘छठी मइया के चरण चूमे, दुःख सब दूर हो जाए…’” “छठ मइया हमारी लोक-आस्था की आत्मा हैं।

हम हर साल यह पूजा करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इस परंपरा से जुड़ी रहे।” “इस अवसर पर मां छठी मैया की एक विशेष आकृति रंगोली, रेत और मिट्टी से उकेरी गई।
यह अद्भुत कलाकृति प्रसिद्ध कलाकार ओमप्रकाश गुप्ता एवं उनके परिवार द्वारा तैयार किया गया।

जिसका उद्देश्य है — आस्था को कला से जोड़ना, और परंपरा को नई पीढ़ी के सामने सजीव करना।”

“पूजन में बाबू दुर्गा प्रसाद जी के संरक्षकत्व में उनके पुत्र गण प्रदीप, मनोज, रंजीत संजीत, मंजीत सहित अनेक श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

सभी ने मिलकर भक्ति गीतों और दीपदान के साथ ‘मां छठी मैया’ से पूरे समाज के कल्याण की प्रार्थना की।”


“माना जाता है कि छठी मैया सूर्य देव की बहन हैं,
जो अपने भक्तों की सच्ची प्रार्थना सुनती हैं और उनके जीवन में प्रकाश भर देती हैं।


यह पर्व हमें सिखाता है कि सादगी में भी भक्ति हो सकती है, और अनुशासन में भी शक्ति।”

“श्री अशोक विला का यह पवित्र परिसर आज आस्था, कला और संस्कृति का संगम बन गया।
मां छठी मैया की महिमा अपरंपार है —
जो भी श्रद्धा से उन्हें प्रणाम करता है,
उसके जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष की किरणें कभी मंद नहीं पड़तीं।

“जब अस्त होते सूर्य की किरणें जल में उतरती हैं,
तो हर दिल में गूंज उठता है एक ही नाम —
‘जय छठी मइया!’
आस्था, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति समर्पण का पर्व — छठ महापर्व — आज पूरे भक्तिभाव से मनाया गया।” “मां अकलेश शक्ति सेवा सदन परिवार एवं पूर्वांचल सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वाधान में
श्री अशोक विला, संग्रहालय मंदिर परिसर में
सायंकाल 5 बजकर 15 मिनट पर
अस्त होते सूर्य देवता को अर्घ्य देकर मां छठी मैया का पूजन एवं आराधना की गई।” “चार दिन के इस पर्व की यह संध्या सबसे पावन मानी जाती है।
भक्त अपने पूरे परिवार के साथ मां छठी मैया की आराधना कर
संतान सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।
कहा गया है —
‘छठी मइया के चरण चूमे, दुःख सब दूर हो जाए…’” “छठ मइया हमारी लोक-आस्था की आत्मा हैं।
हम हर साल यह पूजा करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी इस परंपरा से जुड़ी रहे।” “इस अवसर पर मां छठी मैया की एक विशेष आकृति रंगोली, रेत और मिट्टी से उकेरी गई।
यह अद्भुत कलाकृति प्रसिद्ध कलाकार ओमप्रकाश गुप्ता एवं उनके परिवार द्वारा तैयार किया गया।
जिसका उद्देश्य है — आस्था को कला से जोड़ना, और परंपरा को नई पीढ़ी के सामने सजीव करना।”
“पूजन में बाबू दुर्गा प्रसाद जी के संरक्षकत्व में उनके पुत्र गण प्रदीप, मनोज, रंजीत संजीत, मंजीत सहित अनेक श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर भक्ति गीतों और दीपदान के साथ ‘मां छठी मैया’ से पूरे समाज के कल्याण की प्रार्थना की।”
“माना जाता है कि छठी मैया सूर्य देव की बहन हैं,
जो अपने भक्तों की सच्ची प्रार्थना सुनती हैं और उनके जीवन में प्रकाश भर देती हैं।
यह पर्व हमें सिखाता है कि सादगी में भी भक्ति हो सकती है, और अनुशासन में भी शक्ति।”

“श्री अशोक विला का यह पवित्र परिसर आज आस्था, कला और संस्कृति का संगम बन गया।
मां छठी मैया की महिमा अपरंपार है —
जो भी श्रद्धा से उन्हें प्रणाम करता है,
उसके जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष की किरणें कभी मंद नहीं पड़तीं।

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