
सिर्फ 1500 रुपये से शुरू हुआ सफर, आज करोड़ों का सम्मान — ‘डिब्बे वाली दीदी’ संगीता पांडे की आत्मनिर्भर कहानी
गोरखपुर से अरविन्द श्रीवास्तव : कहते हैं हालात इंसान को तोड़ते नहीं, गढ़ते हैं। सीमित आय, महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक महिला ने हार मानने के बजाय रास्ता बनाया। साइकिल पर घर की दहलीज़ से निकलीं संगीता पांडे ने मात्र 1500 रुपये से डिब्बा और प्रोडक्ट पैकेजिंग का काम शुरू किया। आज वही प्रयास कई महिलाओं के लिए रोज़गार का जरिया बन चुका है। उनके इस साहस और उद्यमिता को खुले मंच से सम्मानित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें एक करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया।




















