पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, जंतर-मंतर से लेकर कुरुक्षेत्र तक उठी आवाज

नई दिल्ली/कुरुक्षेत्र | अरविन्द श्रीवास्तव । देशभर में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्रों और युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। वहीं हरियाणा के कुरुक्षेत्र समेत कई स्थानों पर भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।

जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के समर्थक जुटे। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, पेपर लीक की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन पूरे दिन शांतिपूर्ण ढंग से चला और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

प्रदर्शन के दौरान एक अनोखा दृश्य भी देखने को मिला, जब आयोजकों और समर्थकों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अंगवस्त्र और गुलाब का फूल भेंट कर सम्मानित किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है तथा पुलिसकर्मी केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर हरियाणा के कई जिलों में भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। विशेष रूप से कुरुक्षेत्र में बड़ी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की तेज धारों के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे। इस दौरान कई युवाओं ने कहा कि वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था चाहते हैं तथा भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो रविवार को जंतर-मंतर पर किसी नए धरने या टकराव की स्थिति नहीं बनी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने आगामी रणनीति और देशव्यापी अभियान को लेकर चर्चा की। हालांकि केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।

छात्र संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से अब तक परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए जाने की बात कही जाती रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी इन प्रयासों को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।

फिलहाल देशभर के लाखों अभ्यर्थियों की नजर सरकार और शिक्षा मंत्रालय की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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