नई दिल्ली।अरविन्द श्रीवास्तव । राजधानी दिल्ली में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी माहौल और गर्म हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा समेत कांग्रेस और विपक्ष के कई सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च कर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है।

यह विरोध प्रदर्शन उस पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया, जो “चलो संसद” मार्च के दौरान हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण मार्च पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कई छात्रों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
राहुल गांधी बोले – युवाओं की आवाज़ नहीं दबाई जा सकती
प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछ रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।

संसद से सड़क तक गूंजे नारे
विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर से पैदल मार्च शुरू किया और लोक कल्याण मार्ग की ओर बढ़े। इस दौरान “मोदी इस्तीफा दो”, “युवा विरोधी सरकार नहीं चलेगी” और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारे लगाए गए। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कई नेताओं ने वहीं धरना दिया।
छात्र का भावुक सवाल बना चर्चा का विषय
आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक छात्र पुलिसकर्मियों से भावुक होकर पूछता दिखाई देता है—
“अगर यही आपके बच्चे होते तो आप क्या करते? क्या हम आपके बच्चे नहीं हैं?”
यह वीडियो व्यापक रूप से साझा किया गया है और आंदोलन के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बना। हालांकि, वीडियो की सभी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों की मौजूदगी
प्रदर्शन से जुड़े लोगों का दावा है कि आंदोलन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक हस्तियां भी शामिल थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया। इन दावों पर पुलिस की ओर से अलग से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
संसद में भी उठा मुद्दा
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने संसद में कहा कि संसद पूरे देश की है और जनता के मुद्दों पर चर्चा होना लोकतंत्र की मूल भावना है। विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के भविष्य और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। पुलिस के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और कई पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हुए।
राजनीतिक असर पर नजर
छात्रों के आंदोलन और विपक्ष के इस प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक गरमा सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार विपक्ष की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर कोई बड़ा निर्णय लिया जाता है।







