नई दिल्ली/पटना।अरविन्द श्रीवास्तव । देशभर में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर पिछले 27 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे छात्रों की भावनाओं का सम्मान बताते हुए बड़ा निर्णय कह रहा है, जबकि विपक्ष इसे छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बता रहा है।
दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के कई राज्यों तक फैल गया था। छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल थे। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किए, कई स्थानों पर गिरफ्तारियां भी हुईं।

बीजेपी ने कहा—छात्रों की भावनाओं का सम्मान
बिहार की बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मुद्दे को सोशल मीडिया पर वास्तविकता से अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बड़ा निर्णय लिया है और पार्टी उनके साथ खड़ी है। उनके अनुसार आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे राजनीतिक रंग देने की भी कोशिश हुई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नकल माफिया कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की विरासत हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा में धांधली रोकने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है और संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश किया जाएगा।

विपक्ष ने बताया छात्र आंदोलन की जीत
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह इस्तीफा “युवा क्रांति की जीत” है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ संघर्ष अब रोजगार और जवाबदेही की लड़ाई तक पहुंचेगा। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी छात्रों और युवाओं को बधाई दी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी भी दो प्रमुख मांगें बाकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा कि देश के युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद कर लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को झुकने पर मजबूर किया है। उन्होंने छात्रों से अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
इस बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 27 दिनों का अपना अनशन समाप्त कर दिया। अनशन समाप्त करने के बाद वे दोबारा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे, जहां छात्रों और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। प्रदर्शन स्थल पर “इंकलाब जिंदाबाद” और छात्र एकता के नारे लगाए गए।
आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं और छात्र संगठनों का कहना है कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

राहुल गांधी से मिले छात्र संगठन
छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की गिरफ्तारी और आंदोलन की आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि केवल मंत्रालय बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल दावे
इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें जंतर-मंतर पर एक बुजुर्ग व्यक्ति का वीडियो भी शामिल है, जिसमें वे प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाने पर फटकार लगाते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
हालांकि, इन वायरल वीडियो और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करेगी, पेपर लीक पर प्रस्तावित नया कानून कितना प्रभावी होगा और क्या छात्र आंदोलन अब समाप्त होगा या रोजगार, शिक्षा सुधार और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर आगे भी जारी रहेगा।
देशभर की निगाहें अब संसद में आने वाले विधेयक और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।







