पटना। अरविन्द श्रीवास्तव । बिहार में हाल ही में समाप्त हुए छात्र आंदोलन के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और छात्र संगठनों के आरोपों के अनुसार, धरना-प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कई छात्रों को उनके छात्रावासों और किराये के कमरों से हिरासत में लिया गया। आरोप है कि हिरासत के दौरान कुछ छात्रों के साथ मारपीट की गई और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।

छात्र संगठनों का दावा है कि शनिवार को आंदोलन समाप्त होने और अधिकांश छात्रों के अपने-अपने छात्रावास एवं घर लौट जाने के बाद पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की। आरोप है कि कई छात्रों को कमरों से बाहर निकालकर थानों और पुलिस चौकियों में ले जाया गया, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुछ वायरल वीडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि हिरासत में लिए गए छात्रों को शौचालयों में बंद रखा गया और बाद में उनसे मारपीट की गई। हालांकि, इन वायरल वीडियो और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इसी बीच, छात्र आंदोलन के दौरान गोली चलने की घटना भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोली लगने से घायल हुए दो छात्रों का उपचार जारी है। इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी अभिषेक कुमार पटेल के निलंबन की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घटना की जांच अभी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

छात्र संगठनों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करती है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

इस बीच, आंदोलन से जुड़े संगठन और छात्र नेताओं ने घायल छात्रों से मुलाकात तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि छात्रों के साथ किसी प्रकार की अवैध कार्रवाई हुई है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और छात्र संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की जांच और प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।







