नई दिल्ली। अरविन्द श्रीवास्तव । राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर छात्रों और युवाओं के आंदोलन का केंद्र बन गया है। इस बार विरोध का मुद्दा NEET परीक्षा में पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचकर परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि परिणाम, रैंकिंग और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न हुई शंकाओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर किया है। आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी उठाई। जंतर-मंतर पर छात्रों ने विभिन्न बैनर और पोस्टर के माध्यम से निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग दोहराई।
इस आंदोलन को उस समय और अधिक चर्चा मिली जब लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में सामने आए। उनकी गिरफ्तारी के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई। इस बीच समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले युवाओं से संवाद किया जाना चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजा जाना चाहिए।

हालांकि, वर्ष 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की तुलना में इस बार फिल्मी जगत की सक्रिय भागीदारी कम दिखाई दे रही है। फिर भी सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है और इससे जुड़े वीडियो एवं पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि भारतीय मूल की पूर्व अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जंतर-मंतर पहुंची हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में वायरल दावे को तथ्य के रूप में स्वीकार करना उचित नहीं होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इन परीक्षाओं पर लाखों छात्रों का भविष्य निर्भर करता है। इसी कारण यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की व्यापक मांग के रूप में देखा जा रहा है।

अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है और परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है और आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और प्रभाव पर सभी की नजर बनी हुई है।







