गोरखपुर | अरविन्द श्रीवास्तव | किसी जरूरतमंद को जीवन देने से बड़ा कोई दान नहीं होता और रक्तदान को महादान इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सीधे किसी की जान बचाने का माध्यम बनता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गोरखपुर में मारवाड़ी सेवा समिति ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए नियमित रूप से रक्त उपलब्ध कराना और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

शिविर में बड़ी संख्या में समाजसेवियों, युवाओं, व्यापारियों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। रक्तदाताओं ने इसे केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम बताया। आयोजन स्थल पर रक्तदाताओं का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह की व्यवस्था की गई थी।

मारवाड़ी सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें मरीज के शरीर में पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ लाल रक्त कणिकाएं नहीं बन पातीं। ऐसे मरीजों, विशेषकर बच्चों, को हर कुछ सप्ताह के अंतराल पर रक्त चढ़ाना पड़ता है। यदि समय पर रक्त उपलब्ध न हो तो उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए नियमित रक्तदान ऐसे बच्चों के लिए जीवनरेखा साबित होता है।

समिति ने जानकारी दी कि गोरखपुर जिले में लगभग 300 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं, जबकि इनमें से करीब 90 बच्चों का उपचार बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नियमित रूप से चल रहा है। इन बच्चों को समय-समय पर रक्त की आवश्यकता होती है, जिसके लिए समाज के सहयोग की बेहद जरूरत पड़ती है। इसी उद्देश्य से संस्था समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करती है, ताकि रक्त की कमी के कारण किसी मरीज का इलाज प्रभावित न हो।

आयोजकों ने कहा कि रक्तदान को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। जबकि चिकित्सकों के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति सुरक्षित रूप से नियमित अंतराल पर रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि शरीर कुछ ही समय में रक्त की पूर्ति कर लेता है। इसके साथ ही रक्तदाता के स्वास्थ्य की प्रारंभिक जांच भी हो जाती है।

मारवाड़ी सेवा समिति ने आमजन से भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चों के जन्मदिन या किसी प्रियजन की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर वर्ष में कम से कम एक बार स्वैच्छिक रक्तदान करने का संकल्प ले, तो थैलेसीमिया, दुर्घटना, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हजारों मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है।

शिविर के दौरान रक्तदान करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया और उन्हें भविष्य में भी नियमित रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के सहयोग से ही रक्त की कमी की समस्या का स्थायी समाधान संभव है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से इस अभियान का हिस्सा बनने और दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। इसे केवल एक स्वस्थ व्यक्ति ही दान कर सकता है। ऐसे में प्रत्येक स्वैच्छिक रक्तदाता किसी अंजान व्यक्ति के लिए जीवनदाता बन जाता है। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए यह रक्त केवल इलाज का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके बेहतर भविष्य की उम्मीद भी है।
मारवाड़ी सेवा समिति का यह अभियान एक बार फिर यह संदेश देता है कि “रक्तदान केवल दान नहीं, बल्कि किसी को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है।” समाज के अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी से ही रक्त की कमी जैसी चुनौती पर प्रभावी ढंग से काबू पाया जा सकता है।







