नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 25 जुलाई को दिए गए इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में हैं। CJP (कॉमन जस्टिस प्लेटफॉर्म) का दावा है कि केंद्र सरकार के साथ हुई बैठक में यह सहमति बनी थी कि देशभर में छात्र आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, संगठन का आरोप है कि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।

CJP का कहना है कि दिल्ली पुलिस आंदोलन में शामिल रहे प्रदर्शनकारियों की पहचान कर लगातार कार्रवाई कर रही है। संगठन के अनुसार कई छात्रों और कार्यकर्ताओं को दिन और रात के समय उनके घरों या कार्यस्थलों से हिरासत में लिया जा रहा है।

इसी क्रम में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें आरोप लगाया गया है कि मार्केटिंग का कार्य कर रही एक युवती को महिला पुलिसकर्मियों ने सार्वजनिक स्थान से हिरासत में लिया। वहीं एक अन्य मामले में दावा किया गया है कि आधी रात के समय कुछ वर्दीधारी लोग एक घर में पहुंचे और वहां मौजूद युवाओं को अपने साथ ले गए। इन दावों में यह भी कहा गया है कि संबंधित पुलिसकर्मियों की वर्दी पर पहचान संबंधी नंबर स्पष्ट नहीं थे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है और दिल्ली पुलिस की ओर से इन विशिष्ट दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
CJP ने इन घटनाओं को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के प्रमुख अभिजीत दीपाके ने कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रुकी तो संगठन दोबारा व्यापक आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई उचित नहीं है|

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों में भी चिंता व्यक्त की जा रही है। उनका कहना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच किसी प्रकार की सहमति बनी थी, तो उसका पालन सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और छात्र संगठनों के बीच एक बार फिर संवाद स्थापित होगा या यह विवाद आने वाले दिनों में नए आंदोलन का रूप लेगा।
(नोट: इस समाचार में कुछ आरोप CJP और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।)








