नई दिल्ली/पटना। अरविन्द श्रीवास्तव । देशभर में शनिवार को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विभिन्न राज्यों में श्रद्धांजलि सभाएं, कैंडल मार्च और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों और उनके परिजनों को नमन करते हुए देश की सुरक्षा में उनके योगदान को याद किया।

इसी बीच बिहार में छात्रों के आह्वान पर आयोजित बिहार बंद के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए। सीवान में प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव भी हुआ। इस झड़प में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल होने की सूचना है।
घटना के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी तेजी से वायरल हुए, जिनमें सुरक्षा बलों के जवान AK-47 जैसी राइफल लिए फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी और जांच रिपोर्ट का इंतजार है। विपक्षी दलों ने घटना पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

उधर, पिछले करीब 35 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया। आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और आंदोलन के अगले चरण को लेकर आपसी चर्चा की।

धरना समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से फैली गंदगी को स्वयं साफ किया। उन्होंने कचरा एकत्र कर स्थल की सफाई की और स्वच्छता का संदेश दिया। आंदोलन समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर क्षेत्र को सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।

एक ओर पूरा देश कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं बिहार की घटना ने भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर समाप्त हुए छात्र आंदोलन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि आंदोलन के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता भी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।







