July 29, 2026 11:51 pm

लखनऊ विधानसभा में गरजे योगी ,: सारनाथ–हस्तिनापुर बनेंगे ‘आइकॉनिक सिटी’, आगरा में बनेगा शिवाजी स्मारक

योगी का बड़ा ऐलान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र मंगलवार को उस समय चर्चा के केंद्र में आ गया जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सदन में विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कई अहम घोषणाएँ कर दीं। अपने संबोधन में उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों के पुनरुत्थान और राष्ट्रनायकों के सम्मान को सरकार की प्राथमिकता बताया।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि Sarnath और Hastinapur को ‘आइकॉनिक सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों स्थलों का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। सरकार का उद्देश्य इन शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना है।

सदन में सियासी तकरार

सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के वक्तव्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के समय कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक मुद्दे उपेक्षित रहे, जबकि वर्तमान सरकार उन्हें प्राथमिकता दे रही है।

आगरा में शिवाजी महाराज का स्मारक

मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि आगरा के मीना बाजार क्षेत्र में राष्ट्रनायक Chhatrapati Shivaji Maharaj का भव्य स्मारक बनाया जाएगा। उन्होंने शिवाजी महाराज को राष्ट्र गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उनके साहस और नेतृत्व से प्रेरणा मिलनी चाहिए।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर जोर

मुख्यमंत्री के भाषण में बार-बार यह संदेश उभरा कि उत्तर प्रदेश केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र है। काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे स्थलों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।

विपक्ष का रुख

हालांकि, विपक्ष ने इन घोषणाओं को लेकर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि सरकार को विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। लेकिन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।

आगे की राह

अब निगाहें इस बात पर हैं कि ‘आइकॉनिक सिटी’ परियोजना का स्वरूप क्या होगा और शिवाजी स्मारक के निर्माण की रूपरेखा कब तक सामने आएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये घोषणाएँ आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और सांस्कृतिक विमर्श दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

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