January 15, 2026 1:04 pm

साहित्य की संवेदना को नई दिशा देती हैं शम्स गोरखपुरी की रचनाएँ: दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव

गोरखपुर- सिविल लाइंस स्थित मांगरीष इंफ्रा परिसर में चर्चित शायर एवं कवि अरुण कुमार श्रीवास्तव ‘शम्स गोरखपुरी’ की बहुचर्चित पुस्तक ‘तख़लीक-ए-अरुण’ का भव्य विमोचन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव थे. उन्होंने कहा कि शम्स गोरखपुरी की रचनाएं समाज का आईना प्रस्तुत करती हैं और पाठकों पर गहरी छाप छोड़ती हैं. यह पुस्तक साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी.

विमोचन समारोह की अध्यक्षता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा), महाराष्ट्र के पूर्व प्रति कुलपति प्रो. चितरंजन मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि शम्स गोरखपुरी की यह रचनाएं देशप्रेम, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाती हैं. उनकी गजलों, गीतों और नज़्मों में समाज निर्माण की दिशा दिखाई देती है. प्रो. मिश्रा ने पुस्तक की कई रचनाओं का विस्तृत विवेचन किया और कहा कि वर्तमान समय में ऐसे साहित्य की विशेष आवश्यकता है.

प्रो. मनोज कुमार ने पुस्तक की कुछ रचनाओं का वाचन करते हुए कहा कि लेखक ने हिंदी के साथ उर्दू और फ़ारसी के शब्दों का प्रभावी प्रयोग किया है, जो उनकी भाषा पर मजबूत पकड़ को दर्शाता है.
कार्यक्रम में आर्य समाज गोरखपुर के प्रमुख प्रहलाद गुप्ता सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए.

कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

विमोचन कार्यक्रम के उपरांत एक कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता इंजी. प्रदीप श्रीवास्तव ने की। इस दौरान
अरविंद अकेला, शाकिर अली शाकिर, वसीम, रामसमुझ सांवरा, सुमन वर्मा, डॉ. सरिता सिंह, अंजू विश्वकर्मा, बहार गोरखपुरी, एन.के. त्रिपाठी, प्रेमलता रसबिंदु, ममता प्रीति श्रीवास्तव, ममता विश्वास, विनय मितवा, हाजी मकबूल अहमद मंसूरी, शमित शहजाद, सुरेंद्र मोड़, अभय श्रीवास्तव, नंदजी, वीरेंद्र मिश्र, कौशल गोरखपुरी, सम्बुल हाशमी सहित अनेक कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावी पाठ किया.

समारोह की शुरुआत माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई. ममता विश्वास ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. कार्यक्रम का संचालन मनजीत श्रीवास्तव ने किया.

अंत में लेखक अरुण कुमार श्रीवास्तव ‘शम्स गोरखपुरी’ ने सभी अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

प्रमुख उपस्थित अतिथि

इंजी. प्रदीप श्रीवास्तव, अजय शंकर श्रीवास्तव, रमनजी श्रीवास्तव, इंजी. संजीत श्रीवास्तव, कुंदन वर्मा, शिव श्रीवास्तव, इंजी. रंजीत कुमार, डॉ. सुनील कुमार, संजय श्रीवास्तव, सूर्यभान त्रिपाठी, अजय शंकर, अताउल्लाह शाही, रामजी अग्रवाल, सीए संचित श्रीवास्तव, विष्णु सिंह, मिन्नत गोरखपुरी, राजीव रंजन मिश्रा, नगीना लाल प्रजापति सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे.

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