संभल में फर्जी सिपाही की फिल्मी पोल खुली — कप्तान विश्नोई के सामने छूटी पेंट की डोरी !
संभल की सड़कों पर एक फिल्मी ड्रामा घट गया .
एक फर्जी सिपाही खाकी पहन कर “हफ्ता वसूल अभियान” चला रहा था .
मगर दरोगा जी की तेज़ नज़र और कप्तान कृष्ण कुमार विश्नोई की कड़क कमान के आगे उसका खेल ख़त्म .

लंबाई ने खोल दी लंबी कहानी
चेकिंग चल रही थी, तभी दरोगा जी को एक सिपाही की लंबाई पर शक हुआ .
पूछा — “भैया, कहाँ तैनात हो?”
भैया जी छाती चौड़ी कर बोले — “संभल पुलिस कप्तान कार्यालय में तैनात हूं साहब !”
दरोगा जी को बात जमी नहीं..
उन्होंने कप्तान कृष्ण कुमार विश्नोई को फोन लगाया —
कप्तान बोले — “हमारे यहाँ विष्णु यादव नाम का कोई सिपाही नहीं!”

बस फिर क्या था! आनन् फानन में दरोगा जी ने भैया जी को अपनी गाड़ी में बिठाया और
बॉस के आदेश का पालन करते हुए फटाक से कर दिया कप्तान के सामने .
– कप्तान के सामने पहुंचा तो निकला फर्जी “खाकी हीरो”
जैसे ही कप्तान विश्नोई की निगाह पड़ी —
फर्जी सिपाही का चेहरा उड़ गया !
इतना घबराया कि वहीं खड़ा-खड़ा पेंट में पेशाब कर बैठा!
हाथ जोड़कर बोला —
“साहब, गलती हो गई… मैं फर्जी सिपाही हूँ,
ये वर्दी बस हफ्ता वसूलने के लिए पहनी थी।”
और भाई, जो कमर पर पिस्टल थी?
वो 48 रुपये की खिलौना पिस्टल .
बच्चों की खेलने वाली .
लेकिन इस “खिलाड़ी” ने उसे अपनी “पॉवर” दिखाने का हथियार बना लिया था।
कप्तान विश्नोई का सटीक वार

वैसे भी यूपी में कप्तान कृष्ण कुमार विश्नोई का नाम सुनते ही अपराधी कांप जाते हैं।
याद है करीब साल भर पहले संभल के महाभारत में कप्तान कृष्ण कुमार विश्नोई
ने ऐसा सुदर्शन चक्र चलाया था कि बड़े-बड़े सूरमा धराशाई हो गए थे .
संभल में उनका एक्शन मोड चालू हो तो कोई भी फर्जीवाड़ा टिक नहीं सकता।
इस बार भी उनकी तेज़ सूझबूझ ने “खाकी के फर्जी चमक” को जेल के अंधेरे में पहुंचा दिया .
अब जेल के यूनिफॉर्म में नई कहानी
अब जनाब असली वर्दी छोड़कर जेल की वर्दी पहनेंगे .
संभल पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है और अब ये सिपाही नहीं,
कैदी नंबर… बनने की राह पर हैं!
निष्कर्ष
“वर्दी पहनने से नहीं,
ईमान पहनने से सिपाही बनता है।”











