मुम्बई: हिंदी सिनेमा की आत्मा… शोले का वीरू… और करोड़ों दिलों की धड़कन अभिनेता धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार सुबह आई इस दिल दहला देने वाली खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।
जिस परदे पर उन्होंने “यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…” जैसी अमर दोस्ती रची थी—वही रिश्ता आज हमेशा के लिए टूट गया।

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन गम में डूबे हुए हैं… उनका जिगरी दोस्त, उनका वीरू, उनका साथी—अब हमेशा के लिए खामोश हो गया।
ऐसा ही दर्द हेमा मालिनी की आँखों में भी साफ दिख रहा है—बसंती का वीरू उसे छोड़ गया।
फिल्मी दुनिया ही नहीं, हिंदुस्तान आज एक सच्चे हीरो को खोने के दुख में डूबा है।

धर्मेंद्र—जिन्होंने सिर्फ अभिनय नहीं, दिल भी जीते
8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के साहनेवाल गांव में जन्मे धर्मेंद्र एक साधारण परिवार से निकलकर असाधारण ऊँचाइयों तक पहुंचे।
उनके पिता स्कूल में हेडमास्टर थे—असूलों के पक्के… वही चरित्र धर्मेंद्र के जीवन का हिस्सा बना।
1961 में फिल्मी सफर शुरू हुआ
और देखते ही देखते वो दर्शकों के दिलों के ‘हीमैन’ बन गए।
करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया—और हर किरदार में जीवंतता भर दी।
मीना कुमारी, आशा पारेख, साधना, मुमताज, जया भादुड़ी—सभी उनकी सुपरहिट जोड़ियाँ रहीं।
लेकिन किस्मत उन्हें हेमा मालिनी के करीब लाई।
पहली फिल्म में ही दिल मिल गया… और 1980 में दोनों एक-दूसरे के जीवनसाथी बन गए।
धर्मेंद्र का पहला विवाह 1954 में प्रकाश कौर से हुआ था।
उसी रिश्ते से सनी देओल और बॉबी देओल सहित चार बच्चे हुए।
हेमा मालिनी से ईशा देओल और अहाना देओल का जन्म हुआ।
सम्मान और पहचान
भारतीय सिनेमा में अद्वितीय योगदान के लिए
2012 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
फिल्म ‘घायल’ के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड,
और छह से अधिक लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
उनके शानदार करियर की गवाही देते हैं।
देशभर में सदमे की लहर
धर्मेंद्र के निधन की खबर सुबह होते ही देश–विदेश में जंगल की आग की तरह फैल गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह,
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,
तथा कई राज्यों के नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की।
बॉलीवुड की तमाम हस्तियां सदमे में हैं।
मुंबई के विले पारले श्मशान घाट पर सबसे पहले
अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन पहुंचे।
पूरा देओल परिवार मौजूद रहा।
एक-एक कर सितारे आते गए…
हर चेहरे पर वही सवाल—
“वीरू, इतनी जल्दी क्यों चले गए?”
एक युग का अंत
धर्मेंद्र सिर्फ अभिनेता नहीं थे—
भावनाओं के साम्राज्य के राजा थे।
उनकी मुस्कान में भोलापन, अभिनय में सादगी,
और दिल में सागर जैसा अपनापन था।
आज शोले का जय अकेला रह गया…
बसंती का वीरू चला गया…
और सिनेमा ने अपना असली हीरो खो दिया।














