लखनऊ। देशभर में आज 26 नवंबर को संविधान दिवस धूमधाम से मनाया गया। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में भी संविधान दिवस का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संविधान की प्रस्तावना ‘उद्देशिका’ का सामूहिक वाचन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षाविद और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आयोजन के दौरान प्रतिभाशाली और मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इन छात्रों ने संविधान की जानकारी, जागरूकता और राष्ट्र निर्माण पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में संविधान के महत्व और उसकी भावना का प्रसार करना रहा।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान के रूप में न केवल हमारी विविधता को एक सूत्र में बांधता है, बल्कि यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित है। यह संविधान ही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और स्थिरता का आधार है।


वक्ताओं ने अपील की कि संविधान की मूल प्रति और उसकी प्रस्तावना का वाचन हर परिवार और हर संस्थान में नियमित रूप से होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसके महत्व और अधिकारों-कर्तव्यों की सही समझ मिल सके।

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को स्मरण करते हुए संविधान दिवस को उनके योगदान और दूरदर्शिता को समर्पित किया गया। उनका मार्गदर्शन ही आधुनिक भारत के निर्माण की आधारशिला माना जाता है।
कार्यक्रम के अंत में ‘संविधान सर्वोपरि’ के संदेश के साथ नागरिकों से संविधान के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई।












