मेरठ, 30 नवम्बर 2025 — आपको याद होगा एक प्रसिद्ध टीवी सीरियल महाभारत, 18 दिन चली उसे लड़ाई में तमाम बड़े-बड़े योद्धा मारे गए थे जो सिर्फ हस्तिनापुर राजगद्दी के लिए लड़ी गई थी, आपको यह भी याद होगा कि यह लड़ाई कौरव और पांडवों के बीच लड़ी गई थी, और इसी महाभारत में आश्चर्यजनक और अचरज पूर्ण अस्त्र शस्त्रों का दोनों पक्षों द्वारा भरपूर प्रयोग किया गया था, हस्तिनापुर का वह क्षेत्र अब उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में पड़ता है जहां अब जंगलात हैं, मेरठ जनपद के हस्तिनापुर थाना क्षेत्र में वह स्थान जंगल में आज भी मौजूद है |
उत्तर प्रदेश पुलिस ने शनिवार रात को खिम्मीपुरा खोला नामक जंगल क्षेत्र ( हस्तिनापुर थाना क्षेत्र, मेरठ ) में चल रही एक अवैध हथियार निर्माण यूनिट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में तमंचे, बंदूक, अधबने असलहे और हथियार बनाने वाले उपकरण जब्त किए गए। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अभी फरार है।
क्या हुआ — पुलिस ने कैसे कामयाब ढंग से भांप कर छापा मारा
- जहां हस्तिनापुर पुलिस ने बीती रात अपने गुप्तचर की सूचना पर रेड डालकर भारी मात्रा में तैयार और अर्ध निर्मित तमाम असलेहे बरामद किए हैं।
- पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जंगल के भीतर एक गुप्त असलहा निर्माण यूनिट चल रही है। सूचना के आधार पर शनिवार को स्वाट टीम व स्थानीय थाना पुलिस ने खिम्मीपुरा खोला जंगल में घेराबंदी कर छापा मारा।
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पुलिस के घेराबंदी देख आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मौके से तीन — ताज मोहम्मद, सोनू, और सूरज — को गिरफ्तार कर लिया गया। चौथा आरोपी, विजेंद्र (उर्फ बिंदर), भागने में सफल रहा, जिसकी तलाश जारी है।
क्या बरामद हुआ — तैयार व अधबने हथियार, निर्माण उपकरण
पुलिस ने जो सामान जब्त किया है, उसमें शामिल हैं:
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315-बोर व 312-बोर की बंदूकें, पिस्टल, तमंचे।
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अधबने असलहे, हथियार बनाने की मशीनें एवं उपकरण — जैसे ड्रिल मशीन, ब्लेड, छेनी, हथौड़ी, वेल्डिंग रॉड, स्प्रिंग, लोहे की पट्टी आदि।
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पुलिस के अनुसार, यह देखा गया है कि फैक्टरी बड़े पैमाने पर हथियार बना रही थी, और इन हथियारों की सप्लाई स्थानीय तथा आसपास के जिलों में हो रही थी।

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गिरफ्तार और फरार — आरोपियों की पहचान और उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ताज मोहम्मद, सोनू और सूरज के रूप में हुई है। ये तीनों, पुलिस के अनुसार, पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं।
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फरार आरोपी विजेंद्र उर्फ बिंदर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाश शुरू कर दी है।
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प्रारंभिक पूछताछ में, सोनू और सूरज ने बताया कि वे ताज मोहम्मद के कहने पर अवैध हथियारों को मेरठ और आसपास के जिलों में सप्लाई करते थे।
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पुलिस ने बताया है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, और उन्हें आवश्यक धाराओं (जिनमें आयुध कानून भी शामिल है) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
सामाजिक व सुरक्षा दृष्टिकोण — यह भंडाफोड़ क्यों महत्वपूर्ण है
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इस तरह की अवैध बंदूक-फैक्ट्रियाँ एक बड़ी खतरा होती हैं: तैयार असलहे सड़कों पर, गाँव-शहरों में आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे हिंसा, डकैती, अपराधों में वृद्धि हो सकती है।
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पहले भी, उत्तर प्रदेश में कई बार इसी तरह की अवैध असलहा फैक्ट्रियाँ पकड़ी जा चुकी हैं — लेकिन जंगल या खंडहर इलाकों में चुपके से चल रही फैक्ट्रियों को खोजना हमेशा आसान नहीं होता।
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इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस की सक्रियता, गुप्त सूचना, और त्वरित कार्रवाई न सिर्फ अवैध हथियारों को पकड़ने में बल्कि कानूनी व सामाजिक सुरक्षा बनाए रखने में कारगर हो सकती है।
निष्कर्ष — क्या सबूत मिलते हैं, आगे की कार्रवाई
हस्तिनापुर के खिम्मीपुरा खोला जंगल में पकड़ी गई इस अवैध हथियार फैक्टरी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि किस तरह गैरकानूनी हथियार निर्माण — अक्सर बिलकुल छुपे-छुपे — समाज के लिए खतरा बन सकता है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और एक की तलाश, पुलिस की तत्परता और गहरी पड़ताल की क्षमता का उदाहरण है।
लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है — कितनी अन्य फैक्ट्रियाँ, जंगलों या ग्रामीण इलाकों में, अब भी सक्रिय हो सकती हैं? अवैध हथियारों की सप्लाई-चेन की जड़ तक पहुंचने और उसे तोड़ने के लिए निरंतर गुप्त सूचना तंत्र, मास-चेकिंग और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।
इस भंडाफोड़ के बाद, सुरक्षा एजेंसाओं को चाहिए कि वे इस गिरोह के आपूर्तिकर्ताओं और नेटवर्क की भी तह-कीबीन करें — ताकि बड़ी आपराधिक घटनाओं को रोका जा सके।













