नई दिल्ली: आज की इस भागदौड़ भरी दुनिया में जहां अधिकांश लोग अपनी कमाई अपने परिवार और भविष्य के लिए सुरक्षित रखते हैं, वहीं कुछ ऐसे इंसान भी हैं जो अपनी प्रतिभा को मानव सेवा के लिए समर्पित कर देते हैं। बॉलीवुड की प्रसिद्ध गायिका पलक मुच्छल उन्हीं गिने–चुने नामों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ को सिर्फ करियर नहीं, बल्कि हृदय रोग से जूझ रहे हजारों बच्चों की जिंदगी बचाने का माध्यम बनाया।

▪ पलक मुच्छल कौन हैं?
राजस्थान के कोटा में जन्मी पलक ने महज़ 7 साल की उम्र में अपनी पहली चैरिटी गतिविधि शुरू की थी। आज पलक सिर्फ एक बॉलीवुड सिंगर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय करुणा प्रतीक बन चुकी हैं।
▪ बच्चों की मदद का अनोखा मिशन
पलक अपने हर स्टेज शो और परफॉर्मेंस से होने वाली कमाई को हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों के इलाज में दान करती हैं।
अब तक पलक 2400 से भी अधिक बच्चों की जान बचा चुकी हैं, यह आंकड़ा किसी भी कलाकार के लिए अद्वितीय और प्रेरणादायक है।

▪ क्यों करती हैं यह सेवा?
एक सड़क हादसे में घायल बच्चे को रोते हुए देखने के बाद पलक ने ठान लिया था कि वे अपनी आवाज़ का उपयोग सिर्फ गानों के लिए नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भी करेंगी जिनके माता–पिता इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
▪ बॉलीवुड में पहचान
“मेरे दिल की ये दुुआ है के तु…”,
“चाहूँ मैं या ना…”,
“कौन तुझे यूँ प्यार करेगा…”
जैसे कई सुपरहिट गीतों ने पलक को घर–घर में पहचान दिलाई, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी मानवता, संवेदना और सेवा भावना है।

▪ सम्मान और उपलब्धियां
कई राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय सम्मान
लिम्का बुक और गिनीज बुक में नाम
भारत की सबसे युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल
समापन
आज जब दुनिया आत्महित में डूबी नजर आती है, ऐसे में पलक मुच्छल जैसी कलाकार उम्मीद की किरण हैं — जो संगीत से सिर्फ दिल नहीं जीत रहीं, बल्कि दिलों की धड़कनें भी बचा रही हैं।












