March 1, 2026 10:44 am

वैलेंटाइन डे स्पेशल: प्यार के इस दिन क्या हम मां-बाप को भूल रहे हैं?

14 फरवरी…
दुनिया भर में इज़हार-ए-मोहब्बत का दिन।
गुलाब, गिफ्ट और सोशल मीडिया पर प्रेम के संदेश।

लेकिन क्या इसी देश में कुछ ऐसे भी रिश्ते हैं, जिन्हें हम चुपचाप अकेला छोड़ते जा रहे हैं?

भारत तेजी से बदल रहा है।
फैशन, आधुनिकता और एकल परिवार की सोच ने सामाजिक ढांचे को नई दिशा दी है।
विज्ञान और तकनीक ने दूरियां मिटाई हैं, लेकिन विडंबना यह है कि दिलों के बीच की दूरी बढ़ती दिख रही है।

 आंकड़े जो झकझोर देते हैं

हालिया आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष लगभग 500 बुजुर्ग अपने ही बच्चों की अनुपस्थिति में दम तोड़ देते हैं।
कई मामलों में तो मां-बाप अपने बेटों-बेटियों के विदेश से लौटने का इंतज़ार करते-करते दुनिया छोड़ देते हैं।
कहीं महीनों तक बंद घर में अकेले पड़े बुजुर्ग…
कहीं वृद्धाश्रम में अंतिम सांस लेते माता-पिता…

क्या यह आधुनिकता की कीमत है?
क्या संयुक्त परिवार, जो भारतीय संस्कृति की पहचान रहा है, अब इतिहास बनता जा रहा है?

 संसद में उठी आवाज़

इस गंभीर विषय को राज्यसभा में प्रमुखता से उठाया है पूर्व गोरखपुर विधायक और वर्तमान राज्यसभा सांसद Radha Mohan Das Agrawal ने।

उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि विदेश जाने वाले युवाओं के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे कम से कम सप्ताह में एक बार अपने माता-पिता से बात करें, उनके स्वास्थ्य का हाल लें और अपनी आय का कुछ हिस्सा उन्हें भेजें।
यहां तक कि उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा न किया जाए तो सख्त कदम — यहां तक कि वीज़ा निरस्त करने जैसे प्रावधानों — पर भी विचार होना चाहिए।

डॉ. अग्रवाल ने कई घटनाओं का उल्लेख किया, जहां वृद्ध दंपति की मृत्यु के बाद भी उनके बच्चे विदेश से महीनों तक वापस नहीं लौटे।

 वैलेंटाइन डे का असली अर्थ?

जब पूरा देश “लव” का जश्न मना रहा है, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है —
क्या प्यार सिर्फ पार्टनर तक सीमित है?
या फिर सबसे बड़ा प्रेम वह है, जिसने हमें जीवन दिया?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath का उदाहरण भी चर्चा में है।
व्यस्त राजनीतिक जीवन और उच्च पद पर होने के बावजूद वे अपनी मां के प्रति कर्तव्य और सम्मान नहीं भूलते — यह बात अक्सर उनके समर्थक उदाहरण के रूप में रखते हैं।

 रिश्तों पर पुनर्विचार का समय

ग्रामीण भारत में आज भी बड़ी संख्या में बुजुर्ग अपने घर और परिवार के बीच अंतिम सांस लेना चाहते हैं।
वे महंगे गिफ्ट नहीं, बस दो पल की बातचीत चाहते हैं।
वे विदेशी मुद्रा नहीं, बल्कि अपनापन चाहते हैं।

इस वैलेंटाइन डे पर शायद जरूरत है —
प्यार की परिभाषा को थोड़ा विस्तार देने की।
मां-बाप के लिए समय निकालने की।
और उस संस्कृति को याद करने की, जिसने परिवार को सबसे ऊपर रखा।

क्योंकि आखिरकार,
जिस दिन मां-बाप का आशीर्वाद छूट जाता है,
उस दिन हर उत्सव अधूरा हो जाता है।


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