लखनऊ- विधानसभा के सत्र में आज राजनीतिक तापमान उस समय और बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला।
सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय परंपरा, संस्कृति और आस्था से खिलवाड़ करने वालों को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी गाजी मियां के मेले का समर्थन करती रही है, जबकि उनकी सरकार ने उस ऐतिहासिक विरासत को सम्मान दिया जिसने आक्रमणकारियों का मुकाबला किया।
उन्होंने बताया कि बहराइच में वीरता के प्रतीक महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक तैयार कराया गया है और उनके नाम पर प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय भी स्थापित किया गया है।

इतिहास और सांस्कृतिक सम्मान का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को श्रद्धांजलि देते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित कराई,
जो भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ दल काशी विश्वनाथ धाम और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रयासों का भी विरोध करते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि उनका आस्था से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अयोध्या का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर अयोध्या आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बन चुका है,
जहां प्रतिदिन देश-विदेश से श्रद्धालु आकर नतमस्तक होते हैं।

योगी आदित्यनाथ का यह भाषण केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और आस्था के विमर्श को केंद्र में लाने वाला सशक्त संदेश भी माना जा रहा है,
जिसने विधानसभा से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।

