लखनऊ से बड़ी खबर — नए संवत्सर के पहले दिन आध्यात्म और राजनीति का संगम, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान
नए हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ ही जहां पूरे देश में उत्साह और शुभकामनाओं का माहौल है, वहीं लखनऊ में आध्यात्मिक और राजनीतिक बयानबाज़ी का दौर भी तेज़ हो गया है।

दरअसल, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके समर्थकों का जमावड़ा राजधानी लखनऊ में लगा हुआ है, जहां उन्होंने नए संवत्सर के पहले दिन कई गूढ़ आध्यात्मिक बातें साझा कीं—लेकिन साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला भी बोला।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि इस वर्ष का पहला दिन गुरुवार होने के कारण पूरे संवत्सर के “राजा” स्वयं गुरु हैं। उनके अनुसार, इसका प्रभाव यह होगा कि वर्ष भर अच्छी वर्षा होगी, कृषि समृद्ध होगी और गौ माता का आशीर्वाद बना रहेगा।

हालांकि, उन्होंने “रौद्र” नामक इस संवत्सर को लेकर चेतावनी भी दी। उनका कहना था कि इस वर्ष सत्ता में बैठे “पार्थिव” और अधिक कठोर और निष्ठुर हो सकते हैं, जिससे जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि गुरु के प्रभाव से अंततः जनता ही विजयी होगी और वर्ष के अंत में उत्सव का माहौल बनेगा।
यहीं से उन्होंने सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि गंगा अब “मैया” नहीं बल्कि कमाई का साधन बन चुकी है।
उनका आरोप था कि पहले गंगा में साधारण नौकाएं चलती थीं, लेकिन अब उन पर रेस्टोरेंट और होटल जैसी सुविधाएं विकसित हो गई हैं, जहां पार्टियां होती हैं—जिससे पवित्र गंगा का स्वरूप प्रभावित हो रहा है।

स्वामी के इन बयानों ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म के बीच चल रही बहस को तेज़ कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि योगी आदित्यनाथ सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है।

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