देशभर में पहचान प्रक्रिया, दस्तावेज़ सत्यापन और SIR फॉर्मेट को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को सरल, स्पष्ट और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को एकीकृत (यूनिफॉर्म) फॉर्मेट जारी किया है, जिसके तहत
किरायेदार सत्यापन,
दस्तावेज़ जांच, और
अवैध घुसपैठ करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान
मिशन मोड में की जाएगी।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखते हुए
‘ऑपरेशन पहचान’ को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।

इस नए फॉर्मेट के बाद प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल गए हैं कि किस तरह जिले में रहने वाले लोगों के
दस्तावेज़ों की जांच, सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग की जाए।
सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ अवैध घुसपैठ पर रोक लगेगी, बल्कि आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश का यह नया मॉडल, पहचान प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियंत्रण का एक उदाहरण बन सकता है, जिसे आगे चलकर अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस अभियान के दायरे को और बढ़ाया जा सकता है।

सबसे बड़ी बात तो यह रही जहाँ केंद्र सरकार और उनके अधिकारी SIR को लेकर भरी माथापच्ची से परेशान थे वहीँ उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने एक झटके में इस सर दर्द को काफी हद तक दूर करने में सफलता पायी है और उनकी सोंच औरों से दो कदम आगे निकली।











