March 23, 2026 5:08 pm

राष्ट्रपति मुर्मू का अयोध्या में भव्य स्वागत | रामलला की आरती और श्री राम यंत्र लोकार्पण

अयोध्या की पावन धरती पर इतिहास और आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिला…
जब भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत हुआ…
और फिर वो क्षण आया… जब उन्होंने प्रभु भगवान राम के दरबार में पहुंचकर आरती की…
आख़िर इस पूरे कार्यक्रम में क्या-क्या खास रहा?
कैसा रहा अयोध्या का माहौल?
और “श्री राम यंत्र” का लोकार्पण क्यों माना जा रहा है इतना महत्वपूर्ण?
आइए, पूरी खबर विस्तार से जानते हैं…


अयोध्या एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
अयोध्या… मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी…
आज एक बार फिर ऐतिहासिक बन गई, जब द्रौपदी मुर्मू का आगमन हुआ महार्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर।
जैसे ही उनका विमान उतरा…
पूरा वातावरण “जय श्री राम” के जयघोष से गूंज उठा…
परंपरागत वेशभूषा में सजे कलाकार…
ढोल-नगाड़ों की गूंज…
और पुष्पवर्षा के बीच हुआ उनका जोरदार स्वागत।
यह केवल एक औपचारिक स्वागत नहीं था…
बल्कि यह आस्था, संस्कृति और सम्मान का प्रतीक था।

एयरपोर्ट से राम मंदिर तक यात्रा

एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक का पूरा रास्ता…
मानो एक उत्सव में बदल चुका था।
सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालु…
हाथों में भगवा ध्वज…
और हर चेहरे पर एक ही उत्साह—
“हमारे राष्ट्रपति हमारे रामलला के दर्शन के लिए आए हैं!”
पूरा अयोध्या दीपावली जैसा सजा हुआ नजर आ रहा था…

रामलला दरबार में आगमन

फिर वो पावन क्षण आया…
जब महामहिम राष्ट्रपति पहुंचीं राम मंदिर अयोध्या।
मंदिर की भव्यता…
वातावरण में गूंजते मंत्र…
और श्रद्धा से भरा हर एक पल…
राष्ट्रपति मुर्मू ने विधिवत पूजा-अर्चना की…
और प्रभु रामलला के दर्शन किए।

   आरती का दिव्य दृश्य
जब आरती का समय हुआ…
तो पूरा मंदिर परिसर दिव्यता से भर गया…
दीपों की रोशनी…
घंटियों की गूंज…
और भक्ति में लीन महामहिम राष्ट्रपति…
यह दृश्य न केवल वहां मौजूद लोगों के लिए…
बल्कि पूरे देश के लिए एक भावुक क्षण था।

“श्री राम यंत्र” का लोकार्पण
इस ऐतिहासिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा—
“श्री राम यंत्र” का लोकार्पण।
यह यंत्र केवल एक प्रतीक नहीं है…
बल्कि यह भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, ऊर्जा और विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार…
यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।


इस यात्रा का महत्व
राष्ट्रपति का यह दौरा कई मायनों में खास है—
आस्था और शासन का सुंदर संगम
अयोध्या के बढ़ते महत्व की पुष्टि
और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम
यह केवल एक दौरा नहीं…
बल्कि एक संदेश है—
कि भारत अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।

अयोध्या की इस ऐतिहासिक घड़ी ने एक बार फिर साबित कर दिया—
कि जब आस्था और राष्ट्र एक साथ खड़े होते हैं…
तो इतिहास बनता है।
आप क्या सोचते हैं इस पूरे आयोजन के बारे में?
कमेंट में जरूर बताएं…

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