अरविन्द श्रीवास्तव |लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में प्रदेश के युवाओं को 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं। राजधानी लखनऊ में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है, जिससे युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले भर्ती प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और कोर्ट स्टे की वजह से विवादों में रहती थीं, लेकिन वर्ष 2017 के बाद सरकार ने व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय योग्य युवाओं को अवसर नहीं मिल पाता था और फर्जी डिग्री धारक तक चयन प्रक्रियाओं में शामिल रहते थे।
सीएम योगी के मुताबिक, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग इस वर्ष 32 हजार से अधिक नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी करेगा, जबकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग करीब 15 हजार भर्तियां करेगा। इसके अलावा शिक्षा चयन आयोग द्वारा भी हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी युवा का सपना टूटना सिर्फ एक व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की उम्मीदों को प्रभावित करता है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों, एक्सप्रेसवे और आधुनिक लैब सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में अब मंडल स्तर तक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले प्रदेश में केवल पांच प्रयोगशालाएं थीं, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 18 हो चुकी है। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था और पारदर्शिता के कारण भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आई है।
हालांकि विपक्ष ने सरकार के इन दावों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रदेश में अब भी कई भर्ती परीक्षाएं विवादों और देरी का सामना कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार रोजगार और नियुक्तियों को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

