अरविन्द श्रीवास्तव ( गोरखपुर ) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की सत्ता संभालते हुए 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। राजनीति में 12 साल कोई छोटा समय नहीं होता। इतने लंबे समय में सरकारें बनती हैं, बिगड़ती हैं, लोकप्रियता बढ़ती और घटती है, लेकिन एक चीज जो लगातार बनी हुई है, वह है प्रधानमंत्री मोदी की हर विषय पर पकड़ और उसकी प्रस्तुति का अंदाज|

कभी अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात, कभी पर्यावरण संरक्षण, कभी विज्ञान और अंतरिक्ष की चर्चा, कभी स्टार्टअप्स, कभी मिलेट्स और कभी भारत की सांस्कृतिक विरासत। विषय कोई भी हो, प्रधानमंत्री मोदी उसके बारे में विस्तार से बोलते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन पिछले दिनों “मन की बात” कार्यक्रम में जो देखने को मिला, उसने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच लिया।…..31 मई 2026। देश में भीषण गर्मी की चर्चा चल रही थी। लोग तापमान, लू और मौसम की बात कर रहे थे। उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी अपने मासिक कार्यक्रम “मन की बात” में देशवासियों के सामने आए। लेकिन उन्होंने चर्चा शुरू की गर्मी की नहीं, बल्कि आम की। जी हाँ, उसी आम की जिसे king of fruits / फलों का राजा कहा जाता है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में पैदा होने वाली आम की कई प्रमुख प्रजातियों का जिक्र किया। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, बिहार से लेकर दक्षिण भारत तक, विभिन्न क्षेत्रों के आमों के नाम, उनकी विशेषताएं और उनकी लोकप्रियता का उल्लेख किया |

सवाल यह है कि क्या यह केवल एक सामान्य चर्चा थी? या इसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा था?….. दरअसल, राजनीति में संवाद केवल भाषण नहीं होता। संवाद का अर्थ होता है लोगों के जीवन से जुड़ी बातों को समझना और उन्हें उसी भाषा में संबोधित करना | भारत एक कृषि प्रधान देश है। करोड़ों किसान खेती से जुड़े हैं। आम केवल एक फल नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की जीविका का साधन भी है। जब देश का प्रधानमंत्री आम की प्रजातियों की चर्चा करता है, तो वह केवल फल की बात नहीं कर रहा होता, बल्कि वह देश की कृषि विविधता, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी केंद्र में ला रहा होता है। लेकिन यहाँ एक और प्रश्न उठता है।
क्या किसी प्रधानमंत्री को सचमुच इतनी छोटी-छोटी बातें याद रहती हैं…या रखनी चाहिए ? या फिर इसके पीछे एक बेहद मजबूत तैयारी और अध्ययन की प्रक्रिया काम करती है ?

जो लोग नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को करीब से देखते रहे हैं, उनका कहना है कि मोदी किसी भी विषय पर बोलने से पहले उसका गहन अध्ययन करते हैं। यही कारण है कि कभी वह चंद्रयान की बात करते हैं, कभी योग की, कभी मिलेट्स की और कभी आम की।… राजनीतिक विरोधी भी अक्सर उनकी इसी क्षमता को स्वीकार करते दिखाई देते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी विषयों को केवल छूते नहीं, बल्कि उनके बारे में पर्याप्त जानकारी भी रखते हैं।… हालांकि आलोचक यह भी कहते हैं कि यह उनकी संचार रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वे हर वर्ग के लोगों से जुड़ाव बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन चाहे इसे रणनीति कहिए या व्यक्तिगत रुचि, एक तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि मोदी देश के शायद उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जो विज्ञान से लेकर संस्कृति, खेल से लेकर कृषि और विदेश नीति से लेकर स्थानीय परंपराओं तक, हर विषय पर सार्वजनिक रूप से बात करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि “मन की बात” जैसे कार्यक्रम लगातार वर्षों से जारी हैं।

आज जब राजनीतिक संवाद अक्सर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित हो जाता है, तब मन की बात में कभी जल संरक्षण, कभी परीक्षा, कभी स्वच्छता, कभी खिलौने, कभी मोटे अनाज और कभी आम जैसे विषयों को स्थान मिलता है। अब सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री ने आम की चर्चा क्यों की। सवाल यह है कि क्या किसी राष्ट्रीय नेता के लिए देश के छोटे-छोटे विषयों पर भी नजर रखना एक आवश्यक गुण है? क्या यही व्यापक दृष्टि एक नेता को जननेता बनाती है? या फिर यह केवल राजनीतिक संचार का एक सफल मॉडल है?
और सबसे बड़ा सवाल – 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी ताकत क्या है?…उनकी नीतियाँ?..उनकी राजनीतिक रणनीति?. उनकी स्मरण शक्ति? या फिर देश के हर विषय पर उनकी पैनी नजर? आप क्या सोचते हैं?,,,,,अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए। आपके जबाब का रहेगा इंतज़ार….क्योकि यह सिर्फ एक मोदी का सवाल नहीं है बल्कि विश्व के राजनैतिक मंच पर राजनेताओं के लिए एक नसीहत है।


