JNU परिसर में RSS शताब्दी वर्ष पथसंचलन, होगा जारी विशेष डाक टिकट और सिक्का
नई दिल्ली-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस शताब्दी वर्ष पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में पहली बार शाखा लगी और 250 से अधिक स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध पथसंचलन किया।
- विशेष रूप से इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही कि बड़ी संख्या में Gen Z छात्र-छात्राओं ने स्वयंसेवकों के साथ कदम से कदम मिलाया। इससे JNU की छवि में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
संघ की स्थापना 1925 में महाराष्ट्र के नागपुर में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ का मुख्य उद्देश्य सदैव से देशभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण रहा है। अनुशासन, संयम, साहस और वीरता संघ की मूल भावना मानी जाती है।
शताब्दी समारोह को और ऐतिहासिक बनाने के लिए सरकार की ओर से विशेष रूप से डिजाइन किया गया डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया जाएगा। यह स्मृति चिह्न संघ की 100 वर्षों की सेवा यात्रा का प्रतीक होंगे।
इन 100 वर्षों में RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। संघ के स्वयंसेवक भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास कार्यों में हमेशा सक्रिय रहे हैं। इसके साथ ही संघ के विभिन्न सहयोगी संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, जनभागीदारी को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों को मजबूत बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के दौरान संघ गीत और संघ प्रार्थना की प्रस्तुति ने वातावरण को और भी भावुक बना दिया। खासकर लंदन ऑर्केस्ट्रा में शंकर महादेवन की आवाज़ और हरीश भिमानी के हिंदी अनुवाद में गाई गई संघ प्रार्थना ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
बारिश की बूंदों के बावजूद स्वयंसेवकों का उत्साह कम नहीं हुआ और पथसंचलन पूर्ण शौर्य और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
RSS का शताब्दी वर्ष केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान को नमन करने का अवसर है।













