January 13, 2026 4:43 am

माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछे 14 प्रश्न

अरविंद श्रीवास्तव, गोरखपुर : श्री राम कथा सेवा समिति दिव्यनगर गोरखपुर के तत्वाधान में चल रही श्री राम कथा के चतुर्थ दिवस में अयोध्या धाम से पधारे आचार्य श्री रजनीश शरण महाराज जी ने कथा श्रवण कराते हुए कहा की शिव विवाह के बाद शिव और पार्वती एक साथ बैठकर वटवृक्ष के पास

*|| वटु विश्वास अचल निज धर्मा ||*
*|| तीरथ राज समाज सुकर्मा ||*

वटवृक्ष एक ऐसा वृक्ष है जो विश्वास का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव और पार्वती उसी वृक्ष के नीचे बैठ कर धर्म के बारे में 14 प्रश्न की

पहला प्रश्न था –
*|| नाथ धरेदु नर तक के हेतु ||*
*|| मोहि समझाई कहऊ वृष केतु ||*

हे प्रभु आप ये बताइए कि भगवान हरि ने मानव का अवतार क्यों लिया। भगवान शिव इस प्रश्न पर हंस रहे थे। हंसते हुए भगवान शिव ने अपने प्रभु आराध्य नर रूपी भगवान श्रीराम को याद किया। पार्वती जी से भगवान शिव ने कहा कि इस पृथ्वी पर जब जब धर्म का हरास होता है तब तब भगवान श्री हरि किसी न किसी रूप में मानव की सहायता के लिए, अपने भक्तों की रक्षा के लिए, संतो की वाणी को सत्य करने के लिए सत्य रूपी इस धरा धाम पर अन्य रूप से अवतार लिए है। मेरा हरि निरंकार भी है और सगुण साकार भी है। इस संसार में कोई निरंकार को पूजता है कोई सगुण साकार को पूजता है। ईश्वर एक है नाम अनेक है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी अपने अपने ईश्वर को पूजता है। कोई फूल माला वस्त्र से जैसे हम सनातनी और कोई हाथ फैला करके जैसे मुस्लिम वर्ग, कोई गरीबों की सहायता करके करता है जैस सिख धर्म, कोई दीप प्रज्वलित करके करता है जैसे ईसाई वर्ग।

मेरे राम एक ऐसे देवता हुए मानव रूप में जो कि पूजा–पाठ, अन्न वस्त्र दान, दीप दान, संतो के आश्रम की पूजा करना, सगुण स्वास्थ में भगवान सबको एक धागे में पिरो कर चले। इस वजह से आज भी दुनिया भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहती है। इतना सुन करके पार्वती ने राम जी के अवतार चरित, बाल चरित, विवाह चरित, वनवास प्रसंग ऐसे ऐसे करके 14 प्रश्न पूछी।

अंत में माता पार्वती ने कहा कि
*|| जो प्रश्न पूछा नहीं होई ||*
*|| सो जनी राखेहु मन मोहि ||*

आज समाज में भगवान श्रीराम के मर्यादाओं की अपने जीवन में असीम आवश्यकता है।

इस अवसर पर श्री रामकथा सेवा समिति के अध्यक्ष ध्यान प्रकाश तिवारी, उपाध्यक्ष हीरालाल यादव, सचिव श्री इंदु शेखर पाण्डेय, कोषाध्यक्ष राधेश्याम मौर्य, अनिल उपाध्याय, संतोष कुमार त्रिपाठी, श्यामसुंदर तिवारी, अजय मिश्रा, पंकज राय, मीना दुबे, सरोज गुप्ता, सिन्धु मिश्रा, मालती उपाध्याय, अपर्णा त्रिपाठी एवं आज के कथा के मुख्य यजमान सपरिवार रविंद्र मौर्य एवं समस्त मौर्य परिवार दिव्यनगर हैं। आज की कथा का शुभारम्भ विनोद कुमार द्विवेदी संयुक्त निर्देशक उत्तर प्रदेश सरकार एवं आर एन त्रिपाठी सीनियर ऑडिटर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर प्रज्वलित कराकर किया। अधिक संख्या में श्रद्धालु भक्तजन माताएं और बहनें उपस्थित रही। कथा दिनांक 31-12-2025 तक चलेगी दिनांक 01-01-2026 को प्रातः 8:00 बजे से हवन और अपरान्ह से भण्डारे का आयोजन किया जाएगा।


Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें