नई दिल्ली: यूजीसी (UGC) कानून में बदलाव को लेकर उठा विवाद अब केवल अदालतों की चौखट तक सीमित नहीं रह गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी इस मुद्दे पर सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है। हैरानी की बात यह है कि शिक्षा जगत के इस मुद्दे पर अब देश के बड़े साधु-संतों और शंकराचार्यों ने भी अपनी मुखर प्रतिक्रिया दी है। संतों का मानना है कि यह कानून कहीं न कहीं सनातन परंपरा और हिंदू समाज की एकता पर चोट कर रहा है।
कथावाचकों से लेकर शंकराचार्यों तक में आक्रोश
इस संवेदनशील मुद्दे पर सबसे पहले कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य जी ने अपनी बात रखी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस कानून के प्रावधान तर्कसंगत नहीं हैं और सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। वहीं, स्वामी आनंद स्वरूप ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस कदम को निराशाजनक बताया है।
शंकराचार्यों की गंभीर चेतावनी
देश के सर्वोच्च धार्मिक पदों पर आसीन शंकराचार्यों ने भी इस कानून को समाज के लिए हानिकारक बताया है:
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शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज का तर्क है कि देश में पहले से ही पर्याप्त कानून विद्यमान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “अलग से कानून बनाने की क्या आवश्यकता है? इससे समाज में केवल विद्वेष और आपसी टकराव ही बढ़ेगा।”
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे और भी गंभीर बताते हुए कहा कि यह कानून सीधे तौर पर ‘सनातन’ को क्षति पहुंचाने वाला है।

समाज में विखंडन का डर
प्रसिद्ध संत राजेंद्र दास जी महाराज ने सामाजिक एकता के पहलू पर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि जब हिंदू समाज संगठित हो रहा था, तब “न जाने किसके दिमाग की खुरपेच (साजिश) थी कि ऐसा कानून लाया गया, जिससे संगठित होता हिंदू समाज फिर से विखंडित होने लगा है।”
कानूनी लड़ाई और राजनीतिक समर्थन
इस पूरे विवाद के बीच राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उस योद्धा का सार्वजनिक रूप से सत्कार किया है जिसने इस कानून के खिलाफ सबसे पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वे हैं मृत्युंजय तिवारी, जिन्होंने इस कानून की वैधता को चुनौती दी है।

निष्कर्ष
यूजीसी कानून पर उठ रहे ये सवाल बताते हैं कि मसला सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक पहचान का भी बन गया है। अब देखना यह होगा कि संतों और प्रबुद्ध वर्ग के इस भारी विरोध के बाद सरकार अपने कदम पीछे खींचती है या कानून को लागू करने पर अड़ी रहती है।
मुख्य आकर्षण (Highlights):

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विवाद: UGC कानून के नए संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट के बाद संतों का हस्तक्षेप।
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विरोध: अनिरुद्ध आचार्य और आनंद स्वरूप ने कानून वापसी की मांग की।
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चेतावनी: शंकराचार्यों ने इसे बताया ‘सनातन विरोधी’ और ‘विद्वेष बढ़ाने वाला’।
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सम्मान: मृत्युंजय तिवारी को कोर्ट में अर्जी लगाने के लिए मिला संतों और नेताओं का साथ।










