दिल्ली (अरविन्द श्रीवास्तव ) : एक ओर… धरती पर इंसान…
इंसान का दुश्मन बन बैठा है…तो दूसरी ओर…
वही इंसान… चांद पर जिंदगी तलाशने निकल पड़ा है…जी हां…
जहां एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध की आग भड़क रही है…
वहीं दूसरी तरफ अंतरिक्ष में मानवता का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है…
आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल है—
क्या इंसान, इंसान के साथ रह पाएगा?
एक तरफ अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता तनाव…
तो वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष…

इन हालातों में ऐसा लगता है मानो इंसान…
एक दूसरे को “ मारने और मिटने ” को तैयार खड़ा है…
लेकिन इसी दुनिया में…
एक दूसरी तस्वीर भी है…
जहां विज्ञान… सीमाओं से परे है…
जहां इंसान… एक नई शुरुआत की तलाश में है…
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने
Artemis II मिशन के तहत
53 साल बाद इंसानों को चंद्रमा की यात्रा पर भेजा है…
इस मिशन में शामिल हैं 4 अंतरिक्ष यात्री—
जो चंद्रमा के चारों ओर 10 दिन की यात्रा करेंगे…
और खास बात…
यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं…
बल्कि पूरी मानवता का मिशन बन चुका है…
इसमें कनाडा की भागीदारी…
और भविष्य में यूरोप और जापान जैसे देशों की सक्रिय भूमिका…
और अब कल्पना कीजिए…
एक ओर धरती पर गोलियां चल रही हैं…
और दूसरी ओर…
कुछ वैज्ञानिक… चंद्रमा पर “इंसानी जिंदगी” की संभावनाएं तलाश रहे हैं…

ये वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे—
- क्या चंद्रमा पर इंसान लंबे समय तक रह सकता है?
- क्या वहां पानी, ऑक्सीजन और ऊर्जा के स्रोत विकसित किए जा सकते हैं?
- क्या चांद… इंसान का अगला घर बन सकता है?
धरती पर बंटी हुई दुनिया…
और अंतरिक्ष में एकजुट होता विज्ञान…
एक तरफ युद्ध…
दूसरी तरफ खोज…

एक तरफ विनाश…
दूसरी तरफ सृजन…
यही है आज की सबसे बड़ी सच्चाई…
शायद…
इंसान को अब यह तय करना होगा—
क्या वह धरती को युद्ध का मैदान बनाएगा…
या चंद्रमा को अपनी नई उम्मीदों का घर…
क्योंकि…
जब इतिहास लिखा जाएगा…
तो यह जरूर पूछा जाएगा—
“जब धरती जल रही थी…
तब इंसान चांद पर क्या खोज रहा था?”

