भारत के विभिन्न स्थानों पर जमीन से शिवलिंग के प्रस्फुटित होने की काफी कथाएं प्रचलित रही है ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद स्थित गोलघर क्षेत्र में मां भगवती भी जमीन से प्रस्फुटित हुई है और उसका अभी भी जीता जागता सबूत है। तकरीबन सौ साल पहले इस स्थान के बगल में बहुत पुराना नीम का पेड़ था और ठीक उसके बगल में इकट्ठे हुए लोगों ने भजन कीर्तन आरती शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह स्थान मंदिर के रूप में परिवर्तित हुआ, कहा जाता है माता जी का मंदिर बहुत पुराना है कोई जानता नहीं था। अब इसे लोग बाग़ गोलघर काली मंदिर के रूप में जानते है।
जमीन से माता जी का मुखड़ा बहुत पहले निकला था अभी भी अधिकाँश लोगों को इस बात की कतई जानकारी नहीं है। लेकिन साक्ष्य सच मानने के लिए काफी थे लोग कुछ लोगों की मन्नते पूरी होने लगीं लाला रामौतार लाल शाह इलाके के मानिंद ब्यापारी थे उन्होंने आगे बढ़ कर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया और मंदिर की देखभाल का जिम्मा फेंकू माली को दिया गया।कुछ समय बीता और लाला रामौतार लाल शाह इस दुनिया से कुछ कर गए, लोगों ने उनके पुत्र जंगीलाल शाह को मंदिर का प्रबंधक बनाया। बीच के समय में निर्माण कार्य चलता रहा। १९६९ में माँ काली जंगी लाल को स्वप्न ने दर्शन दिया,इस घटना के बाद जंगी लाल ने माँ काली की मूर्ति स्थापन का प्रण किया,फेंकू माली परिवार की जिम्मेदारियां भी समय के साथ बढ़ती गयीं। बताया जाता है कि रेलकर्मी जगन्नाथ ने जो एक उम्दा मूर्तिकार भी थे उन्होंने माँ के स्वरुप की रचना शुरू की। सबकी इक्क्षा थी कि मूर्ति यहीं बनाई जाए और ऐसा ही हुआ तमाम बाधाओं के बीच सीमेंट सरिया और बालू से आखिरकार यही पर मूर्ति बन कर तैयार हो गईं। आज भी जो मूर्ती लगी है यह वही मूर्ति है जिसे मूर्तिकार जगन्नाथ ने बनाई थी। कालान्तर में फेंकू माली भी इस दुनिया से कुछ कर गए अब मंदिर की देखभाल की जिम्मेदारी फेंकू के पुत्रगण ठाकुर प्रसाद रामअधारे और विंध्याचल को दी गयी। सन२००० में जंगीलाल भी स्वर्गवासी हो गए अब उनके पुत्र सुरेंद्र जायसवाल, जो गोलघर के पार्षद रहे और बाद में डिप्टी मेयर भी बने उन्हें ही प्रबंधकीय राजकाज कि जिम्मेदारी मिली।
प्रबंधक सुरेंद्र जायसवाल का कहना है कि फेंकू माली के वंशज श्रवण,अशोक और संदीप मंदिर की देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मौजूदा समय में मंदिर का जो स्वरूप आपको दिख रहा है वह बड़ा ही भब्य, मनोरम और आकर्षक है। मां काली की वही मूर्ति, काली मंदिर परिसर में राम दरबार, शिव शक्ति समेत पवनसुत हनुमान की मूर्ति और आज भी एक नीम का पेड़ स्थापित है जो मंदिर के मनोहारी दशा को और भी बढ़ाता है, कई राज्यों से आने वाले व्यापारी और भक्त लोग मां काली के इस दरबार में आना नहीं भूलते है। नवरात्रि काल में मंदिर की भीड़ देखने लायक होती है सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता ह। इन 9 दिनों में श्रद्धालु दर्शन अवश्य करते हैं, दूध से बने पेड़े यहां खूब चढ़ता ह। हर साल बड़ी संख्या में लोग उपस्थित होते हैं यहां पर, माता के दर्शन करते हैं।












1 thought on “जहाँ माँ काली धरती से प्रस्फुटित हुईं सौ साल पहले”
जय हो महाकाली