
दुबई : एशिया कप के पूरे 41 सालों के इतिहास में, पहली बार क्रिकेट की दो सबसे बड़ी ताकतें,भारत और पाकिस्तान फाइनल में आमने-सामने उतरीं . दुबई के मैदान पर, टॉस जीतकर कप्तान सूर्य ने पाकिस्तान को बैटिंग की दावत दी. पहली पारी खत्म हुई… और दूसरी पारी में जब भारतीय बल्लेबाज़ी डगमगाई… स्कोरबोर्ड पर भारत के 20 रन पर 3 विकेट गिर चुके थे… तब लग रहा था मानो मैच पाकिस्तान की झोली में जा चुका हो.लेकिन… यहीं से कहानी पलटी. हिंदुस्तान के जुझारू सिपाहियों; तिलक, संजू और शिवम ने अपने दमख़म का ऐसा परिचय दिया कि पूरा दुबई स्टेडियम गूंज उठा.
और फिर आखिरी गेंद पर, पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच न खेलने वाले प्रतिभाशाली रिंकू सिंह ने चौका जड़कर भारत को शानदार पाँच विकेट से जीत दिलाई.

जैसे ही गेंद बाउंड्री पार गई… ऐसा लगा कि भारत में रावण का वध हो गया हो, जीत का माहौल बन गया. कहीं पटाखों की गूंज… कहीं शब्दों का सैलाब, हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. ट्रॉफी समारोह में… कप्तान सूर्य ने कटाक्ष करते हुए पाकिस्तानी हुकूमत के मंत्री से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया. झुंझलाहट में पाकिस्तानी कप्तान ने भी अपना इनाम मंच पर फेंक दिया, लेकिन भारतीय रणबांकुरों ने ट्रॉफी को उठाकर स्टेडियम में तिरंगा लहराया और हर हिंदुस्तानी का दिल जीत लिया. दुबई का मैदान इन ऐतिहासिक लम्हों के कुछ सबसे रोमांचक और यादगार दृश्यों का गवाह बना .












