भारत जैसे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में तमाम समस्याएं फिजाओं में देखने और सुनने को मिलती है इन दिनों यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से बयानबाजी का एक और दौर शुरू हो गया है,, अधिकांश वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम की सराहना की है| हास्य कवि और टिप्पणी कर कुमार विश्वास ने कहा कि भारत इस समय किसी भी प्रकार के विवाद को झेलने की स्थिति में नहीं है ऐसे समय में सरकारों और राजनीतिज्ञों को चाहिए कि समाज में इस समय कोई विभाजन रेखा न खींचें।

हालांकि इस बीच दिल्ली के अधिवक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च तिथि निर्धारित की है दोनों पक्षों कि बात को सुनने तक उक्त कानून पर रोक लगा दी है।
मुखर वक्ता के रूप में जाने जाने वाले गोंडा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पहले तो इस कानून को बदलने की अपील की थी सरकार से और अब उन्होंने कोर्ट के निर्णय की सराहना की |

यद्यपि कोर्ट के फैसले से पूर्व फतेहपुर में अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन कर इस कानून का विरोध किया था,,
कथाकार देवकीनंदन ठाकुर सनातनी नेवी अपनी टिप्पणी में कोर्ट के फैसले का स्वागत किया |
जयपुर से परशुराम सेना के अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर माथे पर लेकिन 1 फरवरी को परशुराम सेना की दहाड़ पूरा देश सुनेगा,,,
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद का पहले का वक्तव्य था कि यदि कानून वापस लिया गया तो हम 85 फ़ीसदी लोग सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे,
और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने कहा ,, कि चूँकि वह वकील भी हैं तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर माथे पर।

इस बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ हिन्दू युवकों ने मुस्लिमो के साथ मिल कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ख़ुशी जाहिर करते हुए आपस में मिठाई भी बांटी।










