गोरखपुर में बढ़ रहा ‘होम-स्टे’ कल्चर, पर्यटकों को घर जैसा माहौल और स्थानीय लोगों को रोजगार
गोरखपुर |अरविन्द श्रीवास्तव । गुरु गोरक्षनाथ की नगरी गोरखपुर अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि यहां तेजी से विकसित हो रही होम-स्टे संस्कृति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी होम-स्टे योजना के तहत शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए खोल रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है और पर्यटकों को घर जैसा आत्मीय वातावरण उपलब्ध हो रहा है।
पर्यटन विभाग के अनुसार, गोरखपुर में पिछले तीन महीनों के भीतर 20 से अधिक आवासों का होम-स्टे के रूप में पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक आवेदन वर्तमान में पंजीकरण प्रक्रिया में हैं। बढ़ती रुचि को देखते हुए विभाग ने जिले में 300 होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पर्यटन के साथ रोजगार का नया मॉडल
होम-स्टे योजना का उद्देश्य केवल पर्यटकों को बेहतर आवास सुविधा देना नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत परिवार अपने खाली कमरे या मकान के अतिरिक्त हिस्से को पर्यटकों के लिए तैयार कर सकते हैं। यहां आने वाले यात्रियों को होटल जैसी औपचारिकता के बजाय स्थानीय संस्कृति, खान-पान और पारिवारिक माहौल का अनुभव मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होम-स्टे मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा देता है। इससे पर्यटक किसी शहर या गांव को नजदीक से समझ पाते हैं।

सरकार ने दी कई महत्वपूर्ण रियायतें
योजना को लोकप्रिय बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई सुविधाएं और छूट प्रदान की हैं। होम-स्टे संचालकों को जीएसटी और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन की अनिवार्यता से राहत दी गई है। इसके अलावा जलकर, गृहकर और अन्य करों को भी आवासीय श्रेणी में रखा गया है।
सरकारी रियायतों के चलते मध्यमवर्गीय परिवारों में इस योजना को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग इस योजना से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।
शहर से गांव तक पहुंची योजना
होम-स्टे योजना को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे ग्रामीण पर्यटन से भी जोड़ा गया है, ताकि गांवों की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव पर्यटकों तक पहुंच सके।
योजना के तहत ऐसे आवासीय भवनों को पंजीकरण के लिए पात्र माना गया है, जिनमें अधिकतम छह कमरे और 12 शैय्याओं तक पर्यटकों को ठहराने की व्यवस्था हो। भवन का मालिक स्वयं आवेदनकर्ता होना चाहिए।
शहरी होम-स्टे को गोल्ड और सिल्वर श्रेणी में विभाजित किया गया है। गोल्ड श्रेणी में अटैच बाथरूम की सुविधा अनिवार्य है, जबकि सिल्वर श्रेणी में कॉमन वॉशरूम की व्यवस्था स्वीकार्य है। गोल्ड श्रेणी के लिए पंजीकरण शुल्क 3000 रुपये और सिल्वर श्रेणी के लिए 2000 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं ग्रामीण डारमेट्री आधारित होम-स्टे के लिए मात्र 100 रुपये का पंजीकरण शुल्क रखा गया है।

अधिकारियों ने जताई उम्मीद
गोरखपुर मंडल के उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, जिले में होम-स्टे योजना को लेकर लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। अब तक 20 आवासों का पंजीकरण पूरा हो चुका है और पर्यटक इन सुविधाओं का लाभ भी लेने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ने के लिए शासन स्तर पर कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं।
निष्कर्ष
धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले गोरखपुर में होम-स्टे संस्कृति का विस्तार पर्यटन को नई दिशा दे रहा है। यह मॉडल न केवल पर्यटकों को स्थानीय जीवन का अनुभव कराएगा, बल्कि स्थानीय परिवारों की आय बढ़ाने और ग्रामीण-शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

