गोरखपुर |अरविन्द श्रीवास्तव | गोरखपुर छावनी रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर पर रामगढ़ताल ब्रिज के बगल स्थित वर्षों पुरानी लोहे की संकरी पुलिया (पाथ-वे) को बंद करने की रेलवे प्रशासन की कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। पुलिया बंद करने के लिए रेलवे के अधिकारी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम मौके पर पहुंची तो बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एकत्र हो गए और कार्रवाई के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन का नेतृत्व पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद ने किया। देखते ही देखते पुल पर हजारों की संख्या में लोग जुट गए। लोगों का कहना था कि यह पुलिया केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि आसपास के हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का प्रमुख माध्यम है। रेलवे कर्मचारी, रेल यात्री, स्कूली छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा लोग और स्थानीय निवासी वर्षों से इसी पुलिया के जरिए एक ओर से दूसरी ओर आते-जाते रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि जनहित को देखते हुए पुलिया को बंद न किया जाए। उनका कहना था कि यदि यह रास्ता बंद कर दिया गया तो लोगों को काफी लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ेगा, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ेंगे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद के अलावा वीरेंद्र सिंह, आर.पी. सिंह, राकेश शर्मा, अभिषेक सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और लोगों ने प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।
रेलवे ने सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
इस पूरे मामले पर पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित कुमार ने बताया कि संबंधित लोहे की पुलिया काफी पुरानी है। इसके निर्माण के समय पुल के साथ एक संकरा रास्ता केवल रेलवे के इंजीनियरिंग सेक्शन के कर्मचारियों के उपयोग के लिए बनाया गया था। समय के साथ आसपास के लोगों ने भी इस रास्ते का इस्तेमाल शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह रास्ता आम जनता के उपयोग के लिए अधिकृत नहीं है। इसकी चौड़ाई कम होने के साथ-साथ यह सुरक्षा मानकों के अनुरूप भी नहीं है। भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा के हित में इस रास्ते को बंद करने का निर्णय लिया है।
जनता बनाम रेलवे का फैसला
एक ओर रेलवे प्रशासन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिया बंद करने के अपने निर्णय को उचित बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिया क्षेत्र की लाइफलाइन है और इसे बंद करने से हजारों लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित होगी।

अब लोगों की निगाहें रेलवे प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।






