July 30, 2026 2:17 am

सरयू में छलांग, मौत से जंग और फिर नई जिंदगी… रेस्क्यू की रोमांचक कहानी

आपदा प्रबंधन टीम ने सरयू नदी में कूदे व्यक्ति को बचाया, लोगों से की सतर्क रहने की अपील,

मई माह में कुल 16 मौतें , गोरखपुर में जलक्रीड़ा के दौरान |

गोरखपुर, अक्षर भारत।

गोरखपुर जनपद नदियों का शहर माना जाता है। राप्ती, सरयू, रोहिन, आमी और गोर्रा जैसी नदियां यहां के जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गर्मी के मौसम में जब स्कूल-कॉलेजों की छुट्टियां होती हैं और तापमान लगातार बढ़ रहा होता है, तब बड़ी संख्या में किशोर और युवा नदी किनारे पहुंचकर जल क्रीड़ा का आनंद लेते हैं। लेकिन कई बार यही रोमांच जानलेवा साबित हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मई और जून के महीनों में नदियों का जलस्तर भले ही कम दिखाई देता हो, लेकिन नदी के भीतर गहराई, तेज बहाव और भंवर का खतरा बना रहता है। अक्सर युवा तैरते-तैरते गहरे पानी में पहुंच जाते हैं और घबराहट में अपना संतुलन खो बैठते हैं। ऐसे में डूबने की घटनाएं सामने आती हैं।

“नदी में रोमांच नहीं, सावधानी जरूरी है”

जिला आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा पूरे वर्ष संवेदनशील घाटों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है तथा लोगों को नदी में सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक किया जाता है। जिला प्रशासन ने कई गांवों में “आपदा मित्रों” की भी नियुक्ति की है, ताकि आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इसके बावजूद डूबने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के केवल मई माह में ही जल क्रीड़ा और डूबने की घटनाओं में 16 लोगों की जान जा चुकी है। यह स्थिति प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।

इसी चुनौती के बीच गुरुवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने आपदा प्रबंधन टीम की तत्परता और साहस को फिर साबित कर दिया।

सरयू नदी में कूदे व्यक्ति को बचाया गया

“मौत के मुंह से लौटी जिंदगी, आपदा टीम बनी फरिश्ता”

बड़हलगंज थाना क्षेत्र में सरयू नदी पर बने पुराने पुल से एक अधेड़ व्यक्ति ने नदी में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आजमगढ़ जनपद के दोहरीघाट निवासी सुरेश घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव से परेशान थे। इसी मानसिक तनाव के चलते उन्होंने सरयू नदी में कूदकर जीवन समाप्त करने का प्रयास किया।

घटना की जानकारी मिलते ही आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई। स्थानीय मछुआरों के सहयोग से मोटर बोट नदी में उतारी गई और तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद सुरेश को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बचाए जाने के बाद छलका दर्द

रेस्क्यू के बाद सुरेश ने बताया कि वह परिवार का मुखिया है और चार बच्चों का पालन-पोषण करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारिवारिक विवाद और मारपीट से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया था। हालांकि समय रहते राहत और बचाव दल के पहुंच जाने से उनकी जान बच गई।

आपदा प्रबंधन टीम की हो रही सराहना

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में आपदा प्रबंधन टीम, स्थानीय मछुआरों और मोटर बोट संचालकों की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि राहत दल समय पर नहीं पहुंचता तो एक और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट सकता था।

सतर्क रहने की अपील

जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि नदी में नहाने या जल क्रीड़ा के दौरान सावधानी बरतें। गहरे पानी में जाने से बचें और बच्चों तथा किशोरों पर विशेष निगरानी रखें। साथ ही जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर आत्मघाती कदम उठाने के बजाय परिवार, मित्रों और संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने का प्रयास करें।

रिपोर्ट : अक्षर भारत ब्यूरो, गोरखपुर

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें